सोमवार, 22 फ़रवरी 2010

गंगा नदी को लिखते हैं चिट्ठियां





इंसानों ही नहीं देवी के पते पर भी यहां पहुंचती हैं चिट्ठियां। ऐसा होता है उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के कछला कस्बे में। यहां स्थानीय लोग देवी स्वरूप जीवनदायिनी गंगा नदी को चिट्ठी लिखकर अपने ऊपर अनुकम्पा करने की प्रार्थना करते हैं।
देवी [गंगा नदी] से कामना करने की ऐसी अनोखी भक्ति की परंपरा यहां 100 साल से भी अधिक पुरानी है। हालांकि यह प्रथा क्यों शुरू हुई इसे लेकर कई मत हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक ऐसी मान्यता है कि गंगा के प्रति इस अनोखी आस्था की शुरुआत उसके जल [गंगाजल] से रोगों से मिली मुक्ति से हुई।
स्थानीय शिवसागर गुप्ता ने बताया कि एक प्रचलित मान्यता के अनुसार गांव में बसे पूर्वज किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त थे। एक बार किसी साधु के कहने से वे गंगा नदी के स्थानीय कछला घाट जाकर गंगाजल घर ले आए और उसे नित्य पीने लगे। धीरे-धीरे उन्हें उस बीमारी से छुटकारा मिल गया।
बाद में उन्होंने गंगा मैया को चिट्ठी लिखने की परंपरा शुरू की। जब भी वे किसी बीमारी से ग्रसित होते तो पत्र लिखकर कहते कि गंगा मैया हमें इस बीमारी से मुक्ति दिला दो..फिर उसे गंगा में प्रवाहित कर देते।
धीरे-धीरे समय के साथ थोड़ा बदलाव आया। लोग अपनी परेशानियों के साथ-साथ अपनी खुशियों में गंगा मैया को शामिल करने लगे। जब भी लोगों के घर में शादी-विवाह, उपनयन, मुंडन या ग्रह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य होते तो वे गंगा मां को चिट्ठी लिखकर घर आने को आमंत्रित करते कि प्रिय गंगा मैया हम आपको आमंत्रित करते हैं..आप हमारे घर आकर हमें कृतार्थ करिए।
स्थानीय ब्रजभान शर्मा कहते हैं कि स्थानीय लोगों की ऐसी मान्यता है कि गंगा मैया उनके आमंत्रण को स्वीकार कर किसी न किसी रूप में उनके घर आकर कार्यक्रमों को खुशी-खुशी सम्पन्न कराती हैं।
गंगा मैया को पत्र लिखने की परंपरा केवल कछला कस्बे के लोगों तक ही सीमित नहीं है। बदायूं जिले के दूसरे इलाकों के अलावा आस-पास कि जिलों के लोग भी कछला घाट आकर त्योहारों और मांगलिक कार्यो के मौके पर गंगा नदी को चिट्ठी लिखते हैं और जल में प्रवाहित कर अपने घर आने का न्योता देते हैं।
दूर दराज के जो लोग नहीं आ पाते हैं वे गंगा मैया को डाक के माध्यम से चिट्ठी लिखकर भेजते हैं। घाट से कुछ ही दूर पर डाकघर [कछला डाकघर] है। जहां पर रोजाना भारी संख्या में गंगा मैया के नाम से चिट्ठिया आती हैं। शाम को सभी चिट्ठियों को लेकर डाकिया गंगा नदी में जाकर प्रवाहित कर देता है।
डाकिया रामभजन सोतिया कहते हैं वैसे आम दिनों में तो रोजाना 40 से 50 चिट्ठिया आती हैं लेकिन त्योहारों के मौके पर इनकी संख्या 200 से 250 पहुंच जाती है। सोतिया अपने आप को भाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें काम करने के दौरान रोज गंगा मैया के दशर्न भी हो जाते हैं। वह कहते हैं कि मैं वास्तव में अपने आप को बहुत खुशनसीब मानता हूं। यह गंगा मां की कृपा है कि उन्होंने मुझे इस काम के लिए चुना।
अरविंद मिश्रा

3 टिप्‍पणियां:

परमजीत बाली ने कहा…

रोचक!!

परमजीत बाली ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Arvind Mishra ने कहा…

यह मेरे द्वारा की गई खबर है, पोस्टलेखक ने अपने नाम से चला दी।